नीमच । भगवान हर घर भगवान नहीं भेज सकता था इसलिए माता-पिता बनाएं। प्रतिदिन सुबह उठकर माता-पिता को दणडवत चरण वंदन करना चाहिए। माता-पिता से हम आशीर्वाद लेते हैं तो उनकी सकारात्मक ऊर्जा हमारी नकारात्मक ऊर्जा को नष्ट कर देती है और हम जीवन के हर क्षेत्र में सफल होते हैं इसलिए प्रतिदिन माता-पिता से सुबह आशीर्वाद लेते रहना चाहिए।
माता-पिता की सेवा संसार की सबसे बड़ी सेवा है ,माता-पिता के चरणों में तीर्थ होता है।उक्त अमृतवाणी पण्डित प्रमोद उपाध्याय ने अपने मुखारविंद से महिला मंडल हुड़को कॉलोनी के तत्वावधान में बगीचा क्रमांक- 1 में आयोजित साप्ताहिक श्री शिव महापुराण कथा के आयोजन में उपस्थित श्रद्धालुओं को प्रवाहित करते हुए कहीं। उन्होंने कहा कि माता-पिता की सेवा करने वाली संतान सदैव महान बनती है। जो माता-पिता संस्कारी होते हैं उनकी संतान शिवाजी और महाराणा प्रताप की तरह महान होती है। शिव पुराण के मध्य पंडित प्रमोद उपाध्याय महाराज ने तारकासुर के पुत्र तारकेश, विद्युत माली, कमलाक्ष्य तीनों से युद्ध में उनका वध पशुपतिनाथ व्रत से किया था और संसार को यह प्रेरणा दी की व्रत उपवास से भी बुराई का अंत किया जा सकता है। गणपति विवाह संसार के लिए आदर्श प्रेरणा हैं।
गणपति ने सिद्ध और रिद्धि दोनों से एक साथ विवाह कर संसार को आदर्श प्रेरणादाई संदेश दिया है कि रिद्धि और सिद्धि दोनों गुणों को आत्मसात कर जीवन का कल्याण कर सकते हैं। गणेश जी ने अपने माता-पिता को ही सर्वोच्च माना और प्रथम पूज्य कहलाए। यदि हम आज किसी भी मांगलिक कार्य को करते हैं और पहले गणेश जी की पूजा करते हैं तो सभी देवताओं का स्वयं ही आमंत्रण हो जाता है। जहां गणपति की पूजा हो जाती है वहां सभी कार्य मंगलकारी होते हैं। मांगलिक कार्यक्रमों में सर्वप्रथम गणेश जी को ही आमंत्रित किया जाता है ताकि सभी मांगलिक कार्य निर्विघ्न संपन्न हो। आरती के बाद शिव महापुराण पोथी पूजन में श्रद्धालु भक्तों ने सहभागिता निभाई। गणपति विवाह की झांकी बनी आस्था का केंद्र। शिव पुराण कथा के मध्य जब पंडित प्रमोद उपाध्याय महाराज ने रिद्धि सिद्धि संग गणपति विवाह का प्रसंग सुनाया तो भक्ति पंडाल में रिद्धि सिद्धि गणपति की जय घोष लगी। गणपति की झांकी ने भक्ति पंडाल में प्रवेश किया तो श्रद्धालुओं ने पुष्प वर्षा से अगवानी की। गणपति की झांकी में बच्चों ने गणपति रिद्धि सिद्धिका अभिनय प्रस्तुत किया। सभी श्रद्धालुओं की आस्था का केंद्र बना।