निम्बाहेड़ा विधानसभा क्षेत्र में सिंचाई एवं जल संरक्षण की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए राजस्थान सरकार ने जलिया राजस्व ग्राम में राष्ट्रीय राजमार्ग के समीप दारू व कदमाली नदियों के संगम स्थल पर श्री सिगरी हनुमान जी एनीकट निर्माण के लिए 749 लाख रुपए (7 करोड़ 49 लाख रुपए) की प्रशासनिक एवं वित्तीय स्वीकृति जारी की है। यह स्वीकृति बजट घोषणा संख्या 166.04.00 वर्ष 2026-27 के अंतर्गत जारी की गई है।
पूर्व यूडीएच मंत्री एवं निम्बाहेड़ा विधायक श्रीचंद कृपलानी की अनुशंसा पर राजस्थान सरकार के जल संसाधन विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव तथा वित्त विभाग (व्यय-3) के संयुक्त शासन सचिव देवेंद्र अरोड़ा ने स्वीकृति जारी करते हुए संबंधित विभाग को एनीकट निर्माण की निविदा प्रक्रिया प्रारंभ करने के आदेश दिए हैं।
जल संरक्षण और सिंचाई को मिलेगा बढ़ावा
प्रस्तावित एनीकट के निर्माण से क्षेत्र में वर्षाजल के संरक्षण एवं जल उपलब्धता को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है। इससे आसपास के क्षेत्र में भूजल स्तर के संरक्षण के साथ कृषि एवं सिंचाई गतिविधियों को भी लाभ मिलने की संभावना है। एनीकट निर्माण से बारिश के पानी को रोकने और उसका बेहतर उपयोग सुनिश्चित करने में मदद मिलेगी।
विधायक कृपलानी ने जताया मुख्यमंत्री का आभार
विधायक श्रीचंद कृपलानी ने सिगरी हनुमान जी एनीकट के लिए 7.49 करोड़ रुपए की स्वीकृति जारी होने पर मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा एवं राजस्थान सरकार के प्रति आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि निम्बाहेड़ा विधानसभा क्षेत्र में जल संरक्षण, सिंचाई सुविधाओं के विस्तार और किसानों को बेहतर जल संसाधन उपलब्ध कराने के लिए निरंतर प्रयास किए जा रहे हैं।
कृपलानी ने कहा कि “सिगरी हनुमान जी एनीकट की स्वीकृति क्षेत्र की लंबे समय से चली आ रही आवश्यकता को पूरा करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के नेतृत्व में राजस्थान सरकार द्वारा निम्बाहेड़ा विधानसभा क्षेत्र के विकास कार्यों को प्राथमिकता दी जा रही है। इस महत्वपूर्ण कार्य के लिए मैं मुख्यमंत्री जी का हृदय से धन्यवाद एवं आभार व्यक्त करता हूं। हमारा संकल्प है कि क्षेत्र में जल संरक्षण और सिंचाई से जुड़ी आवश्यकताओं को प्राथमिकता के साथ पूरा कर किसानों एवं आमजन को अधिक से अधिक लाभ पहुंचाया जाए।”
स्वीकृति जारी होने के बाद अब एनीकट निर्माण के लिए निविदा प्रक्रिया शुरू होने का मार्ग प्रशस्त हो गया है। क्षेत्रवासियों ने भी इस स्वीकृति को जल संरक्षण एवं क्षेत्र के विकास की दिशा में महत्वपूर्ण उपलब्धि बताया है।